
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR No. 11191011260145/2026 के अनुसार, पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कलिंजरा डैम के पास रेड डालकर एक आरोपी के पास से 1 किलोग्राम 975 ग्राम कीमती 'हाइब्रिड गांजा' और अन्य मुद्दामाल जब्त किया था, जिसकी कुल बाजार कीमत 79 लाख 67 हजार 500 रुपये (लगभग 80 लाख) आंकी गई थी। पुलिस तफ्तीश में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि राजस्थान से इस महंगे नशे की सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन में एक मिठाई कारोबारी और उदयपुर निवासी उसके साथी की भी भूमिका थी। पुलिस ने दोनों को 25 मई 2026 को गिरफ्तार कर साबरमती सेंट्रल जेल भेज दिया था। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत में मिठाई कारोबार का जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र पेश करते हुए उसे एक प्रतिष्ठित कारोबारी साबित करने की कोशिश की। इस बीच, आरोपी पर दर्ज पुराने मामलों FIR No. 415/2019 एवं 416/2019 का ब्योरा भी अदालत में पेश किया गया। विशेष एनडीपीएस कोर्ट के जज ए. एन. वोरा ने मामले में चार्जशीट पेश हो जाने और बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा कमर्शियल मात्रा (Commercial Quantity) से कम होने के तकनीकी आधार पर 29 जुलाई 2026 को दोनों को 25-25 हजार रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद मिठाई कारोबारी ने अपनी स्कॉर्पियो कार को छुड़ाने के लिए धारा 497 B.N.S.S. के तहत सेशंस कोर्ट में अर्जी लगाई थी। उसने दलील दी कि वह गाड़ी का वैध मालिक है, गाड़ी धूप-बारिश में सड़ रही है और उसे अपने व्यापारिक कामों के लिए वाहन की जरूरत है। लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। एसओजी क्राइम ब्रांच (SOG) और सरकारी वकील (APP) ने कड़ा विरोध जताते हुए कोर्ट को बताया कि इस लग्जरी वाहन का इस्तेमाल प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के परिवहन के लिए किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए. एन. वोरा ने 24 अगस्त 2026 को सुनाए अपने फैसले में कहा कि आरोपी इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया कि उसकी गाड़ी का इस्तेमाल इस गंभीर अपराध में कैसे हुआ। इस बात की पूरी संभावना है कि यदि वाहन उसे वापस सौंप दिया गया, तो वह इसका उपयोग फिर से इसी तरह के नशे के काले कारोबार में करेगा। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के नजीर फैसलों भोला सिंह बनाम बिहार राज्य और बिश्वजीत डे बनाम असम राज्य का हवाला देते हुए कारोबारी की गाड़ी की कस्टडी अर्जी पूरी तरह खारिज कर दी। मिठाई जैसे आम और भरोसेमंद खाद्य कारोबार से जुड़े किसी व्यक्ति का अंतरराष्ट्रीय स्तर के महंगे नशे 'हाइब्रिड गांजा' की तस्करी नेटवर्क में शामिल होना समाज और पुलिस प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रेस्टोरेंट और मिठाई के कारोबार की आड़ में बेनामी धन को खपाने का काम तो नहीं किया जा रहा था।